Positive Negative Game - Law Of Attraction
Law Of Attraction की सीरीज में आपका एक बार फिर से स्वागत हैं।
जैसा कि हमने भाग 5 में जाना कि जब हम Law Of Attraction का इस्तेमाल करना शूरु कर देते हैं तो हमारे सामने प्रकृति काफी मौके भेजती हैं वो हमें तय करना होता हैं कि हम उनमे से कोनसे मौके को समझ कर अपना Target पूरा कर सके। अगर आपने वो पोस्ट अब तक नहीं पढ़ी हैं तो आप उसे यहाँ से पढ़ सकते हैं।
✓ Unstoppable Opportunities
अब हम बात करने जा रहे है भाग 6 की जिसमे हम आकर्षण के सिद्धांत को और अच्छे से समझ सकेंगे।
मैं एक बात को आपके दिमाग में डालना चाहूंगा कि आप सभी अगर इस Series को देख रहे हैं, पढ़ रहे हैं तो शूरू से Start करे, बीच बीच से इसको ना पढ़े।
भाग 1 से भाग 5 तक का में अपने इस Blog पर पोस्ट कर चुका हूं जिसमे आपको काफी जानकारी मिल पाएगी।
जैसा कि हम शूरु से सुनते आ रहे हैं कि अच्छा बोलो, अच्छा सुनो, अच्छा सोचो। पर हमारा दिमाग ना चाहते हुए भी नकारात्मक सोच रखता हैं और वो ही दिमाग में जम जाती हैं।
वैसे तो हमें नकारात्मक नहीं सोचना चाहिए क्योंकि वो हमारी Real life पर Effect करता हैं पर अगर आप नकारात्मक नहीं सोचोगे तो आप इस दुनिया में रह नहीं पाओगे। सोचने की भी Frequency होती हैं जो हमारे अवचेतन मन तक जाती हैं और वो ही हक़ीक़त में हो जाती हैं। आपको आज Positive/Negative का खेल ही बताऊंगा की हम कैसे दोनों को साथ लेकर चल सकते हैं क्योंकि दोनों का अनुपात होता है जो ये दिखलाता हैं कि आपका दिमाग कोनसे रास्ते पर हैं या आपका दिमाग ठीक चल रहा हैं या नही।
नीचे दिए गए कुछ Points आपको इसका खेल समझा देंगे।
★ हमारा दिमाग Positive(सकारात्मक) सोचने के लिए बना हैं, अपने दिमाग की Primary State ही पॉजिटिव हैं। पर हम ज्यादातर अपने दिमाग की Codding Negative सोचने के लिए कर देते हैं जो कि हमारे लिए काफी नुकसान देती हैं।
★ आप कभी भी अपने दिमाग को काबू नहीं कर सकते, अगर आप इसको काबू करने की कोशिश भी करेंगे तो ये अपना काम अच्छे से नहीं कर पायेगा।
★ अपनी ज़िंदगी को Balance करने के लिए Positive Negative का अनुपात 80:20 हैं। जिसमे 80% हमारा दिमाग Positive होना चाहिए और 20% दिमाग Negative होना चाहिए।
★ अगर आप किसी चीज की Positive सोच रखते हैं तो आपको Negative सोचना भी जरूरी हैं वो उतना ही जरूरी हैं जितना +ve सोचना हैं।
जैसे :
★ आपको हमेशा सकारात्मक सोचने की जरूरत नहीं है, बस नकारात्मक में आप सिर्फ सकारात्मक बाते ढूंढ सकते हैं।
★ अगर कोई रोता हुआ, परेशान हुआ इंसान दिखे तो आप समझ सकते हैं कि उसकी Negativity Ratio 30+ हो चुकी हैं। ऐसा आपके साथ भी हुआ होगा जब ऐसा होता है तो आपका दिमाग काम नही करता बस उस सोच के ऊपर गहराई तक चला जाता हैं।
★ दूसरी तरफ अगर कोई हँसता रहता हैं, किसी की परवाह नहीं करता, खुद की, परिवार की तो वो अपना Positivity Ratio खो चुका हैं। ऐसा दिमाग भी कोई काम का नहीं रहता।
★ मैं आपको एक उदाहरण से Clear करना चाहूंगा कि एक Positive इंसान और Negative इंसान किस तरह से सोचता हैं।
जब दो लोगो का Interview होता हैं तब
पहला इंसान : मैं Fail ना हो जाऊं, बहुत बार Fail हो चुका हूं।
दूसरा इंसान : Resume तैयार करता हैं, अच्छे कपड़े पहनता हैं और दिमाग में सोचता हैं कि अच्छी बात करनी हैं उस चीज की तैयारी कर रहा हैं।
में आशा करता हूं आपको ये पोस्ट पसन्द आई होगी ।
इसको आप अपनी Real Life में भी Apply कर सकते हो।
इस पोस्ट के Related कुछ Quarries हैं तो आप मुझे कमेंट करके पूछ सकते हैं या मेरे Contact Us Form को भर कर मुझे Mail कर सकते हैं।
अगली बार मिलते हैं कुछ नए टॉपिक के साथ तब तक के लिए Good Bye...
जैसा कि हमने भाग 5 में जाना कि जब हम Law Of Attraction का इस्तेमाल करना शूरु कर देते हैं तो हमारे सामने प्रकृति काफी मौके भेजती हैं वो हमें तय करना होता हैं कि हम उनमे से कोनसे मौके को समझ कर अपना Target पूरा कर सके। अगर आपने वो पोस्ट अब तक नहीं पढ़ी हैं तो आप उसे यहाँ से पढ़ सकते हैं।
✓ Unstoppable Opportunities
अब हम बात करने जा रहे है भाग 6 की जिसमे हम आकर्षण के सिद्धांत को और अच्छे से समझ सकेंगे।
मैं एक बात को आपके दिमाग में डालना चाहूंगा कि आप सभी अगर इस Series को देख रहे हैं, पढ़ रहे हैं तो शूरू से Start करे, बीच बीच से इसको ना पढ़े।
भाग 1 से भाग 5 तक का में अपने इस Blog पर पोस्ट कर चुका हूं जिसमे आपको काफी जानकारी मिल पाएगी।
POSITIVE / NEGATIVE G
Positive और Negative का मतलब आपके दिमाग पर जाता हैं कि आप सकारात्मक सोच रहे हैं या नकारात्मक।जैसा कि हम शूरु से सुनते आ रहे हैं कि अच्छा बोलो, अच्छा सुनो, अच्छा सोचो। पर हमारा दिमाग ना चाहते हुए भी नकारात्मक सोच रखता हैं और वो ही दिमाग में जम जाती हैं।
वैसे तो हमें नकारात्मक नहीं सोचना चाहिए क्योंकि वो हमारी Real life पर Effect करता हैं पर अगर आप नकारात्मक नहीं सोचोगे तो आप इस दुनिया में रह नहीं पाओगे। सोचने की भी Frequency होती हैं जो हमारे अवचेतन मन तक जाती हैं और वो ही हक़ीक़त में हो जाती हैं। आपको आज Positive/Negative का खेल ही बताऊंगा की हम कैसे दोनों को साथ लेकर चल सकते हैं क्योंकि दोनों का अनुपात होता है जो ये दिखलाता हैं कि आपका दिमाग कोनसे रास्ते पर हैं या आपका दिमाग ठीक चल रहा हैं या नही।
नीचे दिए गए कुछ Points आपको इसका खेल समझा देंगे।
IMPORTANT POINTS
★ हमारा दिमाग Positive(सकारात्मक) सोचने के लिए बना हैं, अपने दिमाग की Primary State ही पॉजिटिव हैं। पर हम ज्यादातर अपने दिमाग की Codding Negative सोचने के लिए कर देते हैं जो कि हमारे लिए काफी नुकसान देती हैं।
★ आप कभी भी अपने दिमाग को काबू नहीं कर सकते, अगर आप इसको काबू करने की कोशिश भी करेंगे तो ये अपना काम अच्छे से नहीं कर पायेगा।
★ अपनी ज़िंदगी को Balance करने के लिए Positive Negative का अनुपात 80:20 हैं। जिसमे 80% हमारा दिमाग Positive होना चाहिए और 20% दिमाग Negative होना चाहिए।
★ अगर आप किसी चीज की Positive सोच रखते हैं तो आपको Negative सोचना भी जरूरी हैं वो उतना ही जरूरी हैं जितना +ve सोचना हैं।
जैसे :
● जिस व्यक्ति ने हवाईजहाज बनाया Positive Mind रखके, वैसे ही एक Negative Mind वाले व्यक्ति ने पैराशूट का निर्माण किया। यहां आप अच्छे से समझ सकते हैं में आपको क्या समझाने जा रहा हु।★ Negative सोच हमें बचाव करने के तरीके सिखाती हैं जो हमें आगे ज़िन्दगी में जीने का मकसद देती हैं, क्योंकि डर इंसान को ज़िंदा रखता हैं।
● जिस Positive इंसान ने Computer का निर्माण किया, वैसे ही एक Negative इंसान ने Antivirus का निर्माण किया क्योंकि एक Machine में Virus आना आम बात हैं।
● ऐसे ही एक उदाहरण ओर देना चाहूंगा की जिस Positive Mind इंसान ने कार को बनाया जिसको हम सब चलाते हैं, वैसे ही एक Negative इंसान ने कार में Breaks का निर्माण किया जो आपको Accident होने से बचा सकती हैं।
★ आपको हमेशा सकारात्मक सोचने की जरूरत नहीं है, बस नकारात्मक में आप सिर्फ सकारात्मक बाते ढूंढ सकते हैं।
★ अगर कोई रोता हुआ, परेशान हुआ इंसान दिखे तो आप समझ सकते हैं कि उसकी Negativity Ratio 30+ हो चुकी हैं। ऐसा आपके साथ भी हुआ होगा जब ऐसा होता है तो आपका दिमाग काम नही करता बस उस सोच के ऊपर गहराई तक चला जाता हैं।
★ दूसरी तरफ अगर कोई हँसता रहता हैं, किसी की परवाह नहीं करता, खुद की, परिवार की तो वो अपना Positivity Ratio खो चुका हैं। ऐसा दिमाग भी कोई काम का नहीं रहता।
★ मैं आपको एक उदाहरण से Clear करना चाहूंगा कि एक Positive इंसान और Negative इंसान किस तरह से सोचता हैं।
जब दो लोगो का Interview होता हैं तब
पहला इंसान : मैं Fail ना हो जाऊं, बहुत बार Fail हो चुका हूं।
( इसमें आप देख सकते हैं कि इसकी Negativity 80% हैं और Positivity 20% हैं । )
दूसरा इंसान : Resume तैयार करता हैं, अच्छे कपड़े पहनता हैं और दिमाग में सोचता हैं कि अच्छी बात करनी हैं उस चीज की तैयारी कर रहा हैं।
( इसमे आप देख सकते हैं कि इसकी Negativity 20% हैं और Positivity 80% हैं। )इसको डर तो हैं पर इतना नहीं है वो डर को देखते देखते अपनी तैयारी भी कर रहा हैं।
में आशा करता हूं आपको ये पोस्ट पसन्द आई होगी ।
इसको आप अपनी Real Life में भी Apply कर सकते हो।
इस पोस्ट के Related कुछ Quarries हैं तो आप मुझे कमेंट करके पूछ सकते हैं या मेरे Contact Us Form को भर कर मुझे Mail कर सकते हैं।
अगली बार मिलते हैं कुछ नए टॉपिक के साथ तब तक के लिए Good Bye...
